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शराब से करें भैरव अष्टमी के दिन राहू का उपाय

शराब से करें भैरव अष्टमी के दिन राहू का उपाय
यूं तो राहू के लिए कई उपाय प्रचलित हैं मगर इनमें से एक उपाय बहुत कारगर माना जाता है। इसे शराब का उपाय कहते हैं। जानकारों की मानें तो काल भैरव को शराब बहुत पसंद है। यही कारण है कि जहां भी भैरव मंदिर हैं वहां शराब को चढ़ाया जाता है। उज्जैन के काल भैरव मंदिर में तो यहां तक कहा जाता है कि काल भैरव को शराब मुख से पिलाई जाती है। यह शराब कहां जाती है इसका किसी को पता नहीं।
तो आइये आज हम आपको काल भैरव से जुड़ी कुछ रोचक बातें आपको बताएं
19 नवंबर को कालभैरव जयंती है। इस दिन भगवान शिव ने कालभैरव रूप में अवतार लिया था। कृष्णाष्टमी को मध्याह्न के समय भगवान शंकर के अंश से भैरव रूप की उत्पत्ति हुई थी। भगवान भैरव से काल भी भयभीत रहता है इसलिए उन्हें कालभैरव भी कहते हैं। भैरवाष्टमी हमें काल का स्मरण कराती है।
जो व्यक्ति काल भैरव की भक्ति करता है उसके पाप स्वत: दूर हो जाते हैं और मृत्यु के पश्चात इनके भक्तों को शिवलोक में स्थान प्राप्त होता है। काल भैरव के 5२ रूप माने गए हैं। काल भैरव अष्टमी के एक दिन पूर्व एेसी शराब खरीदें जिसका रंग गौ मूत्र के समान हो। सोते समय उसे अपने तकिए को पास रखें। सुबह यानि कालभैरव जयंती के दिन भैरव बाबा के मंदिर जाकर शराब को कांसे के कटोरे में डालकर आग लगा दें। इससे राहु का प्रभाव शांत होगा। मन की समस्त इच्छाएं पूर्ण होंगी। कालभैरव जयंती के दिन भैरव बाबा के मंदिर में जाकर शराब की बोतल चढ़ाकर किसी सफाई कर्मचारी को भेंट स्वरूप दें। इससे भी जीवन में आ रही सभी समस्याआें का अंत होगा। आय के साधनों में वृद्धि होगी।

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