चले सनातन की ओर

जानिए किसके श्राप से लुप्त हो गई सदियों पुरानी गदा विद्या

जानिए किसके श्राप से लुप्त हो गई सदियों पुरानी गदा विद्या
हनुमान और रावणी सेना की लड़ाई हो या भीम दुर्योधन की। बिना गदा के युद्ध की कल्पना नहीं हो सकती। शिव के अवतार भगवान हनुमान ने अपनी गदा से संपूर्ण लंका का विध्वंश कर दिया था। बताते हैं कि उनकी गदा के एक वार से राक्षसी सेना चारो खाने चित हो जाती थी। ठीक इसी तरह महाभारत में भी गदा का उल्लेख है। विशालकाय शरीर वाले भारी भरकम महाबली भीम को सब जानते हैं। उनका श भी गदा ही था। इसी गदा के प्रहार से उन्होंने कौरव प्रमुख दुर्योधन का वध किया। इसी गदा के प्रहार से उन्होंने दुशासन की छाती तोड़ी और उसका लहु पिया।
गदा बहुत प्रचलित रही है। हमारे समाज में गदा का उल्लेख पहलवानी करते वक्त आज भी होता है। मगर यदि हम बात करें कि अन्य श विद्याआें में तो गदा कहीं नहीं आती। गदा से अब कोई युद्ध नहीं होता। पहलवान भी गदा युद्ध नहीं करते। वर्जिश के लिए गदा का इस्तेमाल होता है। मगर, जहां तक इसमें कौशल की कोई प्रतियोगिता की बात करें तो यह अब नहीं है।
धनुष हो या भाला फेंकना हो या गोला फेंकना हो या कुश्ती यह सब प्राचीन इतिहास से जुड़ी युद्ध विद्याएं हैं जैसे गुदा। तो आखिर एेसा क्या हुआ जो गदा की कौशलता से हम आज वंचित हैं। यह समय का फेर है या फिर कोई एेसा श्राप जो गदा विद्या को लगा।
बात करें महाभारत काल की तो गदा महाभारत के युद्ध में प्रमुख हुआ करती थी। भीम, दुर्योधन, बलराम और जरासंग गदा विद्या के महारथी थे। बताते हैं कि उन दिनों गदा युद्ध में कई नियम थे। योद्धा को युद्ध के वक्त इन नियमों का पालन करना अनिवार्य होता था।
महाभारत के युद्ध में भीम ने प्रतिज्ञा ली थी कि वह दुर्योधन का जंघा तोड़ेेंगे। इसी जंघे पर उसने द्रौपदी को बैठाने की बात कही थी। दुर्योधन की माता गांधारी को भी यह बात पता थी। युद्ध के कुछ दिन बीतने पर जब एक-एक कर दुर्योधन की सारी सेना समाप्त होने लगी। तो गांधारी को दुर्योधन की चिंता हुई। उन्हें पता था कि भीम युद्ध में दुर्योधन का जंघा तोड़ेंगे और उसकी मृत्यु होगी। इस पर गांधारी ने दुर्योधन को अपने कक्ष में निव बुलाया। दुर्योधन बड़ी असमंजस में पड़ा। माता का आदेश था और जाना भी था लेकिन, निव जाना कहीं से उचित नहीं था। कहते हैं कि भगवान श्रीकृष्ण को सारी बात बताने पर उन्होंने दुर्योधन से कहा कि वह माता के सामने एेसे न जाए। वह एक केले का पत्ता कमर पर बांध ले। दुर्योधन ने एेसे ही किया। जब दुर्योधन अपनी मां गांधारी के कमरे में गया तो गांधारी जो कि शादी के वक्त से ही अपनी आंखों पर बांध रखी थी। उन्होंने पट्टी हटा दी और एक दृष्टी दुर्योधन पर डाली। इससे उसका सारा शरीर लोहे का हो गया। मगर कमर के जांघ तक का हिस्सा ढंका होने से वह सामान्य ही रहा।
दुर्योधन से युद्ध के दौरान जब भीम उस पर वार करते तो उनका हर वार खाली जाता। कारण दुर्योधन का शरीर लोहे का हो जाना था। काफी कोशिशों के बाद उन्होंने दुर्योधन के कमर के नीचे उस स्थान पर मार करना शुरू किया जो लोहे का नहीं था। दो तीन जोरदार वार में ही दुर्योधन नीचे गिर गया। बताते हैं कि इसी वक्त भीम और दुर्योधन के गुरु बलराम वहां पहुंचे। उन्होंने दुर्योधन की कराह सुनी तो तड़प उठे। उन्हें यह रास नहीं आया कि उनका एक शिष्य दूसरे का वध करे। इस पर उन्होंने भीम को जम कर डांट लगाई। भीम ने अपनी प्रतिज्ञा के बारे में बयाता तो बलराम ने उन्हें गदा विद्या के नियम के बारे में बताया। इन नियमों के तहत एक गदाधारी योद्धा दूसरे गदाधारी योद्धा के कमर के नीचे वार नहीं करता। इस पर भीम ने कहा कि दुर्योधन का पूरा शरीर लोहे का था। एेसे में उसे हराया नहीं जा सकता था और यह युद्ध तो धर्म के लिए है। इस बलराम ने कहा कि धर्म का युद्ध नियमों से लड़ा जाता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब वह युद्ध कौशल सीख रहे थे तब बलराम ने ही उन्हें लौह शरीर से उत्पन्न योद्धा को मारने की कला भी सिखाई थी।
क्रोधित बलराम ने ही भीम को श्राप दिया कि तुमने गदा विद्या का अनादर किया है। आगे आने वाले दिनों में गदा विद्या पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। इससे युद्ध नहीं होंगे। यह सिर्फ पुरानी कहानियों में ही याद रहेगी। बताते हैं कि इसी वजह से गदा युद्ध विद्या पूरी तरह समाप्त हो गई।

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