गुरु

ओशो: मुल्ला नसरुद्दीन के किस्से

ओशो: मुल्ला नसरुद्दीन के किस्से

मुल्ला नसरुद्दीन के बेटे ने उससे पूछा, पापा, मेरे मास्टर जी कहते हैं कि दुनिया गोल है। लेकिन मुझे तो चपटी दिखाई पड़ती है। और ढब्बू जी का लड़का है, वह कहता है, न तो गोल है न चपटी, जमीन चौकोर है। पापा, आप तो बड़े विचारक हैं, आप क्या कहते हैं?

मुल्ला नसरुद्दीन ने आंखें बंद कर लीं। जब बेटा कह रहा है आप बड़े विचारक हैं तो थोड़ा विचारक का ढोंग करना पड़ेगा। आंखें बंद कर लीं, हाथ ठोड़ी से लगा लिया। जैसे तुमने रोडिन की मूर्ति देखी हो–दि थिंकर! हाथ लगाए हुए ठोड़ी से। थोड़ी देर बैठा ही रहा। हालांकि सोच-विचार कुछ नहीं आया, सब तरह की बातें सिर में घूमती रहीं कि आज कौन सी फिल्म देखने जाऊं, क्या करूं, क्या न करूं। बेटे ने कहा, पापा बहुत देर हो गई, अब तक आप पता नहीं लगा पाए? दुनिया गोल है, चपटी है कि चौकोर है?
मुल्ला नसरुद्दीन ने कहा, बेटा, न तो दुनिया गोल है, न चपटी, न चौकोर, दुनिया चार सौ बीस है।
अब कितना ही सिर लगा कर सोचते रहो, मगर सोचोगे भी क्या? तुम्हारा सोच-विचार तुमसे ऊपर नहीं जा सकता। तुम्हारी विनम्रता भी तुमसे ऊपर नहीं जा सकती। तुम्हारी विनम्रता भी चाकर हो जाएगी तुम्हारे अहंकार की। और ये सारे झूठ और झूठों के झमेले हमें सिखाए गए हैं।

अष्टवक्र गीता

ओशो

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