आयुर्वेद

अंग्रेजी दवाएं हुईं फेल तो इस असाध्य बीमारी का होमियोपैथी ने किया ईलाज

 

 

अंग्रेजी दवाएं हुईं फेल तो इस असाध्य बीमारी का होमियोपैथी ने किया ईलाज

होमियोपैथी और आर्युवेद की दवाआें को एेल्युपैथी दवाइयों के मुकाबले कमजोर माना जाता है। मगर यह बहुत कम लोग जानते हैं कि जिन बीमारियों का ईलाज अंग्रेजी दवा पद्धति में नहीं है उसका ईलाज होमियोपैथी और आर्युवेद में है। वर्षों से इन दवाइयों ने लोगों का ईलाज किया है।

एेसे ही एक मर्ज एसएसपीई। इससे पीडि़़त नेहा, जो कि लंबे समय से बीमारी से परेशान थीं अब वह बिल्कुल ठीक हैं। उनके पिता एडवोकेट महेंद्र सिंह ने बताया कि नेहा को झटके आना, यादाश्त चली जाना जैसे लक्षण आ रहे थे। पहले तो उन्होंने इसे बड़ा सामान्य समझा। मगर जब मामला कुछ गंभीर दिखा तो पूरा परिवार सहम गया। बच्ची को लेकर वह गुरुग्राम के नामी अस्पतालों में गए। काफी दिनों तक ईलाज भी चला। मगर मामला नहीं बना। नेहा के हाल में कोई सुधार नहीं हुआ।

महेंद्र सिंह बताते हैं कि नेहा वर्ष 2015 में पांचवी कक्षा में पढ़ती थी। अचानक उन्हें महसूस होने लगा कि बच्ची को कोई दिमागी तकलीफ हो गई है। ईलाज के लिए वह अपनी बेटी को लेकर घूमते रहे फिर गुरुग्राम के एक बड़े नामी अस्पताल में गए। यहां पर पता चला कि यह क्या बीमारी है। बताया गया कि इस बीमारी को एसएसपीई कहते हैं। यह खसरे का इंजेक्शन न लगाने की वजह से होता है या उसके प्रभावी न होने से होता है। इस बीमारी में बच्चे की यादाश्त चली जाती है। हाथ पैर में सिकुडऩ होने लगती है। बच्चा कोमा में भी जा सकता है। इसमें सात से दस सेकेंड तक झटके आते हैं और बच्चा बैठे-बैठे गिर जाता है। उस नामी अस्पताल के बाद एक दूसरे अस्पताल में गए मगर यहां भी कोई हल नहीं निकला तो यहीं के चिकित्सकों ने बताया कि इस इसका अंग्रेजी दवाआें के जरिए ईलाज नहीं हो सकता। एेसे में उन्हें डा$ गुनवंत आेसवाल से पुणे में जाकर संपर्क करना चाहिए। उनके जी थैरेपी से कई बच्चों का ईलाज हुआ है। चिकित्सकों की राय मानकर महेंद्र सिंह अपनी बीमार बच्ची को लेकर पुणे के लिए रवाना हो गए।

जुलाई 2016 में जब डास्टर आेसवाल के पास गए तो वहां पता चला कि इस गंभीर बीमारी का मुफ्त में यहां ईलाज होता है। डा. आेसवाल की टीम ने नेहा को दो दिन तक अपनी निगरानी मेेंं रखा। पूरी टीम पांच—छह डाक्टरों की थी। फिर तीन महीनें तक की दवाई देकर उन्हें भेज दिया। वहां पर होमियोपैथी जी थैरेपी में ईलाज किया गया। इस बीमारी का छोटे सेंटर पर तो पता ही नहीं चलता इसलिए काफी बच्चे ईलाज से वंचित रह जाते हैं। डा$ गुनवंत आेसवाल पुणे के पास पांच सौ से भी ज्यादा इस बीमारी के मरीज हैं। इसमें 15—2 बच्चे दिल्ली एनसीआर के हैं। दिल्ली—पलवल-मेरठ-रेवाड़ी, मुजफ्फरनगर, गुडग़ांव से भी काफी बच्चे यहां ईलाज के लिए जा चुके हैं। एडवोकेट महेंद्र सिंह का कहना है कि उनकी बेटी नेहा अब पूरी तरह ठीक हो चुकी है। उन्होंने बताया कि किसी को भी इस बीमारी का ईलाज डा. आेसवाल से करवाना हो तो वह इंटरनेट के जरिए उनका पता ले सकता है।

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