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पित्रों के लिए स्वर्ग का रास्ता खोलता है मोक्षदा एकादशी का व्रत

पित्रों के लिए स्वर्ग का रास्ता खोलता है मोक्षदा एकादशी का व्रत

मोक्षदा एकादशी या मोक्ष एकादशी का दिन हिन्दू धर्म के लिए बहुत शुभ है। इसी दिन भगवान कृष्ण ने अर्जन को गीता का ज्ञान दिया था। 18 अध्याय वाली गीता में वह सब है जो आज के युग के व्यक्ति को चाहिए। गीता सिर्फ एक किताब नहीं बल्कि एक दर्शन है। इसके हर एक श्लोक का गहरा मतलब है। गीता के ज्ञान को अपने जीवन में अपनाने से हर दुख तकलीफ दूर हो जाती है। इस वर्ष मोक्षदा एकादशी 8 दिसंबर को मनाई जाएगी।

हम सब जानते हैं कि गीता का ज्ञान भगवान कृष्ण ने अर्जुन को युद्ध भुमि में दिया। जो वास्तव में एक मार-काट का क्षेत्र था। दो सेनाएं आपस में आमने सामने थीं और जल्द ही एक-दूसरे पर टूटना चाहती थीं। अर्जुन व्यथित थे। क्या करें सामने गुरु, परिजन और वो सखा जो साथ खेले। उनसे युद्ध वो भी मात्र सम्पत्ति और सम्मान के लिए।

एेसे में भगवान कृष्ण की वाणी से उन्हें वो बताया गया शायद अर्जुन को भी अमर कर गया। इसी गीता का जन्म मोक्ष एकादशी को माना जाता है। इस दिन व्रत करने का बड़ा ही गहरा औचित्य है। वैष्णव पंत में इस दिन का खास महत्व बताया गया है। गीता पूरी तरह से जीवन और उसके विस्तार की पुस्तक है। कहते हैं कि इस दिन भगवान कृष्म को याद कर व्रत रखने से पित्रों को शांति मिलती है। उनके लिए स्वर्ग का द्वार खुल जाता है।

एक कथा के अनुसार चंपा नगरी में एक प्रतापी राजा वैखानस रहा करते थे$ चारों वेदों के ज्ञाता राजा वैखानस बहुत प्रतापी और धार्मिक राजा थे$ उनकी प्रजा खुशहाल और संपन्न थी$ एक दिन राजा ने सपना देखा, जिसमें उनके पिता नरक में यातनाएं झेलते दिखाई दिए$ सपना देखने के बाद राजा बेचौन हो उठे और सुबह होते ही उन्होंने पत्नी को सबकुछ बता दिया। राजा ने यह भी कहा, इस दुख के कारण मेरा चित्त कहीं नहीं लग रहा है, मैं इस धरती पर सम्पूर्ण एेशो—आराम में हूं और मेरे पिता कष्ट में हैं। पत्नी ने कहा महाराज आपको आश्रम में जाना चाहिए।

राजा आश्रम गए वहां पर कई सिद्ध गुरु थे, जो तपस्या में लीन थे। राजा पर्वत मुनि के पास गए और उन्हें प्रणाम कर उनके पास बैठ गए। पर्वत मुनि ने मुस्कुराकर आने का कारण पूछा। राजा अत्यंत दुखी थे और रोने लगे। तब पर्वत मुनि ने अपनी दिव्य दृष्टि से सब कुछ जान लिया और राजा के सिर पर हाथ रखकर बोले, तुम एक पुण्य आत्मा हो, जो अपने पिता के दुख से इतने दुखी हो। तुम्हारे पिता को उनके कर्मों का फल मिल रहा है। उन्होंने तुम्हारी माता को तुम्हारी सौतेली माता के कारण बहुत यातनाएं दीं। इसी कारण वे इस पाप के भागी बने और अब नरक भोग रहे हैं। राजा ने पर्वत मुनि से इसका हल पूछा इस पर मुनि ने उन्हें मोक्षदा एकादशी का व्रत का पालन करने और इसका फल अपने पिता को देने के लिए कहा। राजा ने विधि पूर्वक व्रत किया और व्रत का पुण्य अपने पिता को अर्पण कर दिया। व्रत के प्रभाव से राजा के पिता के सभी कष्ट दूर हो गए। उन्हें नरक के कष्टों से मुक्ति मिल गई। स्वर्ग को जाते उन्होंने अपने पुत्र को आशीर्वाद भी दिया।

 

 

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