गुरु

क्यों होती है भगवान गणेश की सर्वप्रथम पूजा

क्यों होती है भगवान गणेश की सर्वप्रथम पूजा—

पौराणिक कथाओं कथाओं के अनुसार एक बार भगवान शिव और पार्वती के दोनों पुत्र गणेश और कार्तिकेय के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। भगवान शिव ने काफी सोच-विचार कर एक प्रतियोगिता आयोजित की और कहा कि जो अपने वाहन पर सवार होकर समस्त तीर्थ और संपूर्ण पृथ्वी की परिक्रमा करके पहले लौटेगा वही पृथ्वी पर प्रथम पूजनीय होगा।

कार्तिकेय ने शिवजी एवं पार्वती जी का आशीर्वाद लिया और अपने वाहन मोर पर तुरंत सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने के लिए निकल पड़े।

इधर गणेश जी सोच में पड़ गए कि मेरा वाहन तो चूहा है। चूहा थोड़ा छोटा है और हम थोडे़ मोटे हैं। इस तरह तो हमारी हार पक्की है। तब गणेश जी ने सोचा कि माता-पिता में संपूर्ण तीर्थ होते हैं यदि मैं इनकी परिक्रमा कर लूंगा तो मुझे समस्त तीर्थ और समस्त पृथ्वी की परिक्रमा करने का फल मिल जाएगा।

ये सोचकर श्री गणेश जी महाराज ने अपनी मां पार्वती और पिता शिव जी से आशीर्वाद लिया और अपने माता-पिता की सात बार परिक्रमा कर शांत भाव से उनके सामने हाथ जोड़कर खड़े हो गए।

इधर कार्तिकेय अपने वाहन मयूर पर सवार हो पृथ्वी का चक्कर लगाकर लौटे तो श्री गणेश को स्थान पर खड़ा पाकर कार्तिकेय ने कहा कि यह प्रतियोगिता मैंने जीत ली है क्योंकि गणेश जी अभी तक यहीं खड़े हैं। तब शिव जी ने कहा- पुत्र गणेश आपसे पहले ब्रह्मांड की परिक्रमा कर चुका है, वही प्रथम पूजा का अधिकारी होगा।

कार्तिकेय गुस्सा होकर बोले, पिताजी, यह कैसे संभव है? गणेश अपने वाहन चूहे पर बैठकर कई वर्षों में भी पूरी परिक्रमा नहीं कर सकता है! पिताजी आप मजाक क्यों कर रहे हैं ?

तब भगवान भोले नाथ बोले- नहीं बेटे! गणेश अपने माता-पिता की परिक्रमा करके यह प्रमाणित कर चुका है कि इस ब्रह्माड में मात-पिता से बढ़कर कुछ नही है। गणेश ने संपूर्ण जगत् को इस बात का ज्ञान कराया है इसलिए इस दुनिया में सबसे पहले गणेश को ही पूजा जाएगा। इस तरह गणेश प्रथम पूजनीय बन गए।
Supported by Astrologer Dr. Rajender Kumar

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