चले सनातन की ओर

आखिर राम के अलावा और किस—किस से हारा था रावण

आखिर राम अलावा और किस—किस से हारा था रावण
रावण के बारे में जिक्र आते ही हमें राम—रावण के युद्ध की बात सामने आ जाती है। रावण अहंकारी था। उसने माता सीता का हरण किया था। बाद में राम के हाथों युद्ध में उसका वध हुआ। इन कथाआें में एक बात साफ रहती है कि रावण अहंकारी जरूर था मगर वह महाबली और महा विद्वान भी था। उसने तीनों लोकों को जीता था। देव, असुर, गंदर्भ आदि कोई भी जीव उसको जीत नहीं पाया था।
मगर जनश्रुतियों के अनुसार रावण राम के अलावा भी हार चुका है। तो आज हम यही बताने जा रहे हैं। दरअसल रावण राम के अलावा वानर राज बाली, असुरराजा बली, सहबाहु अर्जुन और महाकाल शिव से हार चुका था। उसका खुद का अहंकार उसे हराने के लिए काफी था। दरअसल रावण इस मद में चूर था कि वह किसी से हार नहीं सकता।
तो सबसे पहले हम बात करते हैं वानर राज बाली की। तो बाली को लेकर कहा जाता है कि वह बहुत बलशाली और पराक्रमी थे। उनकी वीरता का डंका बजता था। एक बार रावण को किसी ने बाली के बारे में बताया तो उसने खुद बाली को हराने की ठानी। वह बाली के पास गया और उनसे युद्ध करने के लिए ललकारने लगा। बाली उस समय पूजा कर रहे थे। मगर बार-बार रावण के विघ्न डालने पर वह उससे युद्ध करने आ गए। जैसे ही रावण उनसे लडऩे को आगे बढ़ा बाली ने अपनी कांख में उसे दबोच लिया। कहते हैं कि बाली में इतनी गती थी कि चार समुद्र की परिक्रमा एक बार में कर लेते थे। उन्होंने रावण को अपनी कांख में दबा कर चारो समुद्रों का चक्कर लगा लिया। बाद में उसे छोड़ दिया।
इसके बाद दूसरी कथा में रावण लड़ाई करने के लिए पाताल के राजा बलि के पास गया। बलि बहुत बड़े योद्धा थे। कहते हैं कि जब रावण युद्ध करने उनके महल में गया तब वहां कुछ बच्चे खेल रहे थे। उन बच्चों ने रावण को पकड़ लिया और अस्तबल में बांध दिया। रावण की सारी हेकड़ी निकल गई और वह वहां से हार कर भागा।
इसके बाद तीसरे युद्ध में रावण ने सहबाहू अर्जुन से लड़ाई कर ली। सहबाहू अर्जुन की हजार भुजाएं थीं। इसी वजह से उनका नाम सहबाहू पड़ा। एक कहानी के अनुसार रावण अपनी पूरी सेना लेकर सहबाहू अर्जुन से लडऩे पहुंचा। उसे आता देख सहबाहू अर्जुन ने अपनी भुजाआें से यमुना के पानी को रोक लिया। जैसे ही रावण की सेना उनके पास पहुंची उन्होंने पानी को छोड़ दिया। पानी का इतना वेग था कि रावण की सेना बह गई। इसके बाद रावण वहां से भागा। एक बार फिर जब वह उनसे लडऩे पहुंचा तो इस बार भी सहबाहू अर्जुन ने उसे हरा कर भगाया।
चौथी लड़ाई में हार हुई खुद महाकाल शिव से। एक प्रचलित कथा के अनुसार रावण को अंहकार हो गया कि वह शिव जी से भी बड़ा बलशाली है। वह भगवान शिव को अपने साथ ले जाना चाहता था। मगर शिव जी ध्यान में बैठे थे। रावण को कुछ ना सूझा तो उसने पूरा कैलाश पर्वत ही उठा लिया। शिव जी ने पर्वत हिलता देखा तो पैर के अंगूठे का भार पर्वत पर रख दिया। इसके बाद तो रावण पूरे पर्वत के नीचे ही दब गया। अपनी जान आई देख रावण ने शिव जी की स्तूती करनी शुरू कर दी। अपनी भुजा को वीणा बना कर संगीत निकाला और बाद में भगवान शिव ने उसे माफ कर दिया।

Facebook Comments

You may also like