मित्रता का है बड़ा महत्व
बिना किसी रक्त संबंध के भी मनुष्य बांटता है एक दूसरे से अपने सुख-दुख :
स्वामी विवेकानंद
गुडग़ांव, 10 फरवरी (अशोक): मनुष्य एक सामाजिक प्राणी है और साथ ही उसमे विचारों को व्यक्त करने एवं भावनाओं को महसूस करने की शक्ति होती हैं। इसी कारण मनुष्य अकेला नहीं रह सकता। एक मनुष्य दूसरे मनुष्य अथवा किसी अन्य प्राणी की तरफ आकर्षित होता हैं। मित्रता का बड़ा ही महत्व है।

उक्त उद्गार आर्य समाज के आत्मशुद्धि आश्रम के वार्षिकोत्सव में पर्णकुटि आश्रम के अधिष्ठाता स्वामी विवेकानंद महाराज ने प्रवचन करते हुए व्यक्तकिए। उन्होने कहा कि मनुष्य बिना किसी रक्त संबंध के भी अन्य लोगों से अपने सुख-दुख बांटता है और उनकी मदद भी करता है। ऐसे ही संबंधों को मित्रता का संबंध कहा जाता हैं। उन्होंने आर्य समाज के प्रयासों की सराहना भी की। मित्रता के संबंधों को और स्पष्ट करते हुए महाराज जी ने कहा कि विद्या प्रवास में रहने वाले की मित्र होती है, घर में रहने वाले की मित्र पत्नी होती है, रोगी का मित्र वैद्य होता है और मरने वाले का मित्र दान होता है। इस सबका उल्लेख यक्ष-युधिष्ठर संवाद में भी मिलता है। उन्होंने कहा कि विपत्ति के समय के लिए धन की रक्षा की करनी चाहिए, लेकिन धन से अधिक रक्षा पत्नी की करनी चाहिए। इस कार्यक्रम को वरिष्ठ आर्य समाजी कन्हैयालाल आर्य सहित अन्य वक्ताओं ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में क्षेत्र के गणमान्य व्यक्ति भी बड़ी संख्या में शामिल हुए।

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