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कैसे बचाई बृहस्पति ने महादेव से इंद्र की जान

कैसे बचाई बृहस्पति ने महादेव से इंद्र की जान
देवताआें के देवता इंद्र की कई कहानियां हमने सुनी हैं। इंद्र को हमेशा अपने सिंहासन की चिंता रहती है। समय—समय पर भगवान ने कई बार उनकी परीक्षा भी ली है। इसमें कई बार वो पास हुए तो कई बार फेल। इसी तरह एक बार उनका सामना देवों के देव महादेव से हुआ। तो इस बार वो कैसे बचे आज हम आपको यह बताने वाले हैं।
एक बार बात है इंद्र और बृहस्पति देव कैलाश पर्वत पर भगवान शिव के दर्शन के लिए चले। इंद्र की बड़ी इच्छा थी की वह महादेव के दर्शन कैलाश पर्वत पर करें। लेकिन महादेव भी महादेव हैं। उनके बारे में कहा जाता है कि राजसी तडक़-भडक़ से नहीं बल्कि शुद्ध प्रेम से ही उन्हें जीता जा सकता है। भगवान शिव को जब पता चला कि इंद्र और बृहस्पति उनके दर्शनों के लिए आ रहे हैं तो उन्होंने इंद्र की परीक्षा लेनी चाही। शिव पुराण के मुताबिक भगवान शिव ने अपना रूप बदला और अवधूत बनकर उनके सामने खड़े हो गए।
शरीर अग्नि की तरह धधक रहा था। भयंकर शरीर में महाकाल प्रचंड लग रहे थे। एक बारगी तो उन्हें देखते ही बड़े से बड़े योद्धा के पसीने निकल जाएं। देवराज इंद्र और बृहस्पति जैसे ही आगे बढ़े तो मार्ग में रास्ता रोके अवधूत खड़े थे। इंद्र ने उन्हें मार्ग से हटने और रास्ता देने को कहा। मगर वह टस से मस नहीं हुए। इस पर इंद्र का अहंकार जागा। वह देवताआें के राजा था। पूरे देवलोक में उनका राज था फिर एक साधारण प्राणी उनके मार्ग में खड़ा होकर उन्हें रास्ता ना दे यह उन्हें कैसे सहन होता। इंद्र ने महाकाल को साधारण समझ उन पर अपने वज्र से प्रहार करना चाहा। मगर महादेव की एक नजर पड़ते ही वज्र और जिस हाथ से इंद्र ने वज्र उठा रखा था दोनों ही जड़ हो गए। अब इंद्र दर्द से कराहने लगे।
दूर खड़े बृहस्पति सारा नजारा देख रहे थे। उन्हें समझ में आया गया कि यह साधारण प्राणी नहीं हैं। साक्षात महादेव का अवतार हैं। वह यह भी समझ गए कि महादेव इंद्र की परीक्षा ले रहे हैं। यदि थोड़ी देर और की गई तो इंद्र यहीं भस्म हो जाएंगे। उन्होंने तुरन्त महादेव की स्तुति गानी शुरू कर दी। इंद्र से भी कहा कि वह भी महादेव की स्तुति करें। दोनों महादेव के चरणों में लेट गए। उनकी प्रार्थना देख भगवान शिव अपने असली रूप में आए। उन्होंने बृहस्पति को उनकी भक्ती के लिए आर्शीवाद दिया। साथ ही उन्होंने बृहस्पति से कहा कि तुमने इंद्र की जान अपनी सूझबूझ और भक्ती भाव से बचाई है। इसलिए तुम्हारा एक नाम जीव भी पड़ेगा। बृहस्पति देव की पूजा से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं।

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